कपड़ों का मक़सद सिर्फ तन ढकना नहीं कपड़ें हमारे व्यक्तित्व का आईना होते है। कपड़े " रोटी कपड़ा और मकान " वाली त्रिमूर्ति में आने वाली एक बेसिक ज़रूरत नहीं बल्कि कपड़े आपकी image को नयी directions प्रदान करतें हैं। अगर एक औसत व्यक्ति की अलमारी खोल कर देखा जाए तो उसके पास उसकी जरूरत से ज़्यादा कपड़ें होंगें पर अगर उसे किसी function में जाना हो उसे उस अलमारी में पहनने लायक़ कपड़े शायद ही मिलें इसलिए अक्सर कोई फंक्शन अटेंड करने से पहले आपको मार्किट जाने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि फैशन हर पल बदलता है आज जो चीज़ ट्रेंड में है हो सकता है वो चीज़ कल आउट ऑफ फैशन हो जाए। और अच्छा दिखने की इस अंधी दौड़ में कोई भी पीछे छूटना नहीं चाहता। हमारी इसी भूख ने आज फैशन इंडस्ट्री को दुनिया की दूसरी सबसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री बना दिया है। इंसानों द्वारा पैदा किया जाने वाले हानिकारक कार्बन का 10 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ फैशन इंडस्ट्री से निकल...